"एक मीठी ग़ज़ल"(रुबाइ)

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"सुहाग    रात   की   वो  नर्म  निगाहों की कसक ,  अदा - अदा  में  बेशुमार  बिजलियों   की   लपक ,  उसी     को     हम   ...

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